
केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने अपने जन्मदिन के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अपने राजनीतिक सफर और पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान से मिली सीख को साझा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।
कार्यकर्ताओं ने खुशी और दुख दोनों के पल साथ मिलकर बिताए हैं, लेकिन इन तमाम परिस्थितियों में एक चीज ने सभी को जोड़े रखा, वह था उनके नेता का आशीर्वाद और मार्गदर्शन।
पिता की सीख को बताया मुश्किल वक्त का सबसे बड़ा मंत्र
चिराग पासवान ने कहा कि उनके पिता ने हमेशा उन्हें सिखाया कि जब भी विपरीत परिस्थितियां आएं तो जनता के बीच जाना चाहिए। जनता से जुड़ाव ही मुश्किल समय में सही दिशा दिखाता है।
उन्होंने कहा कि उनके पिता का मार्गदर्शन हमेशा यही रहा कि राजनीति में जनता के साथ संबंध केवल कठिन समय में नहीं, बल्कि लगातार बनाए रखना चाहिए।
जनता से निरंतर जुड़ाव पर दिया जोर
चिराग ने कहा कि जो व्यक्ति निरंतर जनता के बीच रहता है, उसे विपरीत परिस्थितियों का सामना ही नहीं करना पड़ता। जनता का आशीर्वाद और समर्थन ही किसी भी राजनीतिक यात्रा की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने पार्टी की मौजूदा स्थिति और यहां तक पहुंचने के सफर का श्रेय अपने पिता के आशीर्वाद, उनके मार्गदर्शन और उनकी दिखाई राह को दिया।
कार्यकर्ताओं के संघर्ष और साथ को किया याद
अपने संबोधन में चिराग ने पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक सफर में खुशी के आंसू भी बहाए और दुख के दौर भी देखे।
तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद सभी एकजुट रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बिताए गए संघर्षपूर्ण समय को याद करते हुए कहा कि नेता का आशीर्वाद और मार्गदर्शन ही सबको बांधे रखने का आधार रहा है।



