पंजाबराज्य

केवल ढिल्लों ने नशे के खतरे को पंजाब का ‘सबसे बड़ा, सबसे संवेदनशील’ मुद्दा बताया

पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बुधवार को कहा कि पंजाब कई महत्वपूर्ण मुद्दों का सामना कर रहा है, लेकिन नशीले पदार्थों का खतरा राज्य के सामने ‘सबसे बड़ा और सबसे संवेदनशील’ मुद्दा है।

संगरूर जिले में गुलजार सिंह की मौत और नशीले पदार्थों के खतरे से जुड़ी परिस्थितियों का जिक्र करते हुए ढिल्लों ने कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को कथित तौर पर धमकाया जा रहा है और हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है, जिससे कुछ लोगों को आत्महत्या जैसे चरम कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, बिजली की कमी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी प्राथमिकता के आधार पर हल करने की जरूरत है, लेकिन पंजाब में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और नशीली दवाओं से संबंधित मौतों में वृद्धि ने खतरनाक रूप ले लिया है।
सार्वजनिक सूचना

ढिल्लों ने कहा कि ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि नशे के खतरे के खिलाफ पंजाब के लोगों को एकजुट करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं, परिवारों और समाज को नशे से बचाने के लिए सामूहिक जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता अभियान के तहत राज्य के हर वर्ग और क्षेत्र के लोगों तक पहुंचेंगे।

नशे के दुरुपयोग के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई द्वारा आयोजित की जा रही यात्रा के फाजिल्का चरण की तैयारियों की बुधवार को यहां आयोजित एक बैठक में समीक्षा की गई। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, पंजाब प्रभारी और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया और ढिल्लों ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत की और व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

यह यात्रा 20 सितंबर को सादकी भारत-पाकिस्तान सीमा के पास आसफवाला युद्ध स्मारक से शुरू होगी।

पंजाब भाजपा जोन-3 यात्रा के प्रभारी रंजम कामरा ने कहा कि यात्रा फाजिल्का जिले से शुरू होगी और मुक्तसर, फरीदकोट, मोगा, जगरांव, मलेरकोटला और लुधियाना होते हुए 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त होगी।

पूनिया ने कहा कि पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे की चपेट से बाहर निकालने में मदद करना समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य न केवल नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता पैदा करना है, बल्कि इस मुद्दे को व्यापक सार्वजनिक चर्चा और भागीदारी का विषय बनाना भी है।

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