अंतरराष्ट्रीय

दुनियाभर के एक्सपर्ट्स से ईरान जंग जीतने का तरीका पूछ रहा अमेरिका, क्यों आई ये नौबत?

अमेरिका और ईरान का टकराव एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति खुद को एक कूटनीतिक और सैन्य चक्रव्यूह में फंसा हुआ महसूस कर रही है. अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए कई हफ्तों तक भारी बमबारी और हवाई हमले किए हैं. लेकिन, जमीनी हकीकत यह है कि लगातार हमलों के बावजूद न तो होर्मुज स्ट्रेट का संकट पूरी तरह खत्म हुआ है और न ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस समाधान निकल पाया है.

अब स्थिति यह है कि अमेरिका को सिर्फ हवाई हमलों के दम पर अपने लक्ष्य हासिल करना लगभग नामुमकिन लग रहा है. यही कारण है कि अमेरिकी सैन्य रणनीतिकार अब इस युद्ध से बाहर निकलने और ईरान पर नकेल कसने के लिए बिल्कुल नए और गैर-परंपरागत तरीकों की तलाश कर रहे हैं.

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पेंटागन का ईमेल अभियान
CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, CENTCOM के एक खुफिया अधिकारी ने मिलिट्री एनालिस्ट्स के एक बड़े समूह को ईमेल भेजा है. इसमें कहा गया है कि अमेरिका, ईरान पर दबाव बनाने और उसे सजा देने के लिए नए, रचनात्मक और गैर-परंपरागत तरीकों की तलाश कर रहे हैं. पेंटागन के एक्सपर्ट्स की ओर से इस तरह ईमेल भेजकर रणनीतियों के लिए क्राउडसोर्सिंग और ब्रेनस्टॉर्मिंग करना बेहद असामान्य है. एक जानकार सूत्र के मुताबिक, यह साफ तौर पर दर्शाता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अब ईरान को अपनी शर्तों पर झुकाने के लिए विकल्प बेहद सीमित रह गए हैं.

हवाई हमले क्यों हो रहे हैं बेअसर?
अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत उसकी वायुसेना है, लेकिन ईरान के मामले में यह ताकत आधी पड़ गई है. इसका सबसे बड़ा कारण ईरान की भौगोलिक बनावट और उसकी रणनीतिक तैयारी है.

ईरान ने अपने सबसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों (जैसे फोर्डो और नतान्ज़) को पहाड़ों के अंदर बहुत गहराई में बनाया है. इन अंडरग्राउंड बंकरों की परतें इतनी मोटी हैं कि अमेरिका के बड़े से बड़े ‘बंकर बस्टर’ बम भी इन्हें पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम नहीं हैं.
भारी बमबारी के बावजूद ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के रुख में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. वे लगातार अमेरिकी दबाव का सामना कर रहे हैं.
अमेरिका के 18 सैनिकों की मौत
हवाई हमलों की विफलता के बाद आम तौर पर अगला कदम जमीनी सेना को उतारना होता है, लेकिन अमेरिका के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है.

ईरान में जमीनी सेना भेजने का मतलब है एक ऐसे युद्ध की शुरुआत जो सालों तक खिंच सकता है. ईरान का भूभाग इराक या अफगानिस्तान से कहीं अधिक जटिल है.
इस मौजूदा तनाव और छिटपुट सैन्य संघर्षों में अब तक 18 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 500 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं.
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ट्रंप की राजनीतिक मजबूरी और चुनावी वादे
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह संकट केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है. ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी जनता से स्पष्ट वादा किया था कि वह अमेरिकी सैनिकों को विदेशी धरती पर चलने वाले लंबे युद्धों में नहीं झोकेंगे.

ऐसे में ट्रंप के सामने एक बड़ी चुनौती है. उन्हें ईरान पर दबाव भी बनाए रखना है ताकि वह परमाणु हथियार न बना सके और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही हो सके, लेकिन साथ ही उन्हें किसी बड़े जमीनी युद्ध में फंसने से भी बचना है. यही वह दुविधा है जिसने अमेरिकी सेना को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बिना गोली चलाए या बिना बड़ी सेना भेजे, ईरान की कमर कैसे तोड़ी जाए.

क्या हो सकते हैं नए और अलग तरीके?
CENTCOM नए तरीके खोज रहा है, ऐसे में अमेरिका इन 3 गैर-परंपरागत रणनीतियों पर फोकस कर सकता है.

साइबर युद्ध: अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है. जैसा कि रिपोर्ट किया गया है, वाटर सिस्टम और डिसैलिनेशन प्लांट्स पर साइबर अटैक पहले ही युद्ध का एक नया मोर्चा बन चुके हैं.
आंतरिक विद्रोह को हवा देना: ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के कारण पहले से ही जनता में भारी असंतोष है. न्यू यॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में विपक्षी गुट किसी भी वक्त एक नए राष्ट्रव्यापी विद्रोह की चेतावनी दे रहे हैं. अमेरिका इस आंतरिक गुस्से को गुप्त तरीके से हवा देकर ईरानी सरकार को अंदर से कमजोर कर सकता है.
सख्त आर्थिक नाकेबंदी: निकी हेली और अन्य अमेरिकी एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान को रोकने का एकमात्र तरीका उसकी फंडिंग के सभी रास्ते पूरी तरह बंद कर देना है.

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