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न्यायाधीशों के वेतन, सेवा शर्तों की समीक्षा करने की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में न्यायाधीशों के वेतन और सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग (एनजेपीसी) के गठन की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने महाराष्ट्र राज्य न्यायाधीशों के संघ की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगते हुए मामले की सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की। एसोसिएशन ने केंद्र को तत्काल एक एनजेपीसी का गठन करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है जो उच्चतम न्यायालय और सभी 25 उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते, अनुलाभ, सेवा शर्तों, पेंशन, सेवानिवृत्ति के बाद के लाभों और सेवा की अन्य शर्तों की व्यापक समीक्षा और सिफारिश करे।

एसोसिएशन ने एनजेपीसी को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि वह अपने गठन के 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें केंद्र को सौंपे। इसमें तर्क दिया गया है कि केंद्र और राज्यों को रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के तीन महीने के भीतर सिफारिशों को लागू करना चाहिए।

याचिका में मांग की गई है कि एक ऐसी प्रणाली जिसके तहत न्यायिक वेतन और सेवा शर्तों में समय-समय पर संशोधन के लिए हर 10 साल में एक नया एनजेपीसी गठित किया जाए और बीच की अवधि के दौरान न्यायिक वेतन को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू महंगाई भत्ते में संशोधन के अनुरूप समायोजित किया जाए।

न्यायालय ने केंद्र शासित प्रदेशों में अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों को आठवें वेतन आयोग के विचारार्थ विषयों में शामिल करने को इस आधार पर चुनौती दी है कि यह 1993 के फैसलों में न्यायिक वेतन पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों और अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ के मामलों में बाद के आदेशों के खिलाफ है।

शीर्ष अदालत ने 1993 के अपने फैसले में कहा था कि अधीनस्थ न्यायपालिका की सेवा शर्तों को उन्हीं वेतन आयोगों को सौंपने की प्रथा पर पुनर्विचार की आवश्यकता है जो अन्य सरकारी सेवाओं से संबंधित हैं और न्यायिक सेवा शर्तों के लिए विशेष रूप से एक स्वतंत्र आयोग की आवश्यकता है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि न्यायिक अधिकारियों के पास एक अलग वेतन संरचना होनी चाहिए और वेतन आयोग या समितियों का गठन करते समय उनके वेतन पर विशेष रूप से विचार किया जाना चाहिए

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