दिल्लीराज्य

‘न्याय की भावना’ तो है, लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, अंकित शर्मा का परिवार चाहता है कि इस मामले को ‘दुर्लभतम मामले’ के रूप में माना जाए।

खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा के परिवार ने शुक्रवार को कहा कि इस फैसले से राहत तो मिली है, लेकिन उन्हें अपना खोया हुआ भाई नहीं मिला। परिवार ने यह बात तब कही जब पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान उनकी हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को हुसैन और चार अन्य लोगों को शर्मा की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने सजा सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि दोषियों में सुधार की गुंजाइश नहीं है।

“लगभग छह साल तक इस मामले की लड़ाई लड़ने के बाद, हमारे परिवार को आखिरकार न्याय मिलने का अहसास हुआ है,” अंकित के भाई अंकुर शर्मा ने पीटीआई को बताया।

अंकुर ने इसे “एक बहुत लंबी और दर्दनाक यात्रा” बताते हुए कहा कि कई बार ऐसा लगा कि कानूनी प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होगी, लेकिन परिवार को न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा कि शुक्रवार के फैसले से उन्हें “कुछ राहत” मिली है और यह एहसास हुआ है कि वर्षों का उनका इंतजार और संघर्ष व्यर्थ नहीं गया।

उन्होंने आगे कहा कि परिवार पिछले छह वर्षों से हर दिन इस दुख के साथ जी रहा है। उन्होंने बताया कि जब भी उनके भाई का मामला टेलीविजन बहसों, अखबारों या बातचीत में उठता है, तो उन घावों को फिर से हरा कर देता है जो कभी भरे ही नहीं थे।

हर बातचीत उन्हें इस बात की याद दिलाती थी कि अंकित अब उनके साथ नहीं है। उन्होंने कहा, “यह हम सभी के लिए भावनात्मक रूप से बहुत कठिन था, लेकिन हमें उम्मीद थी कि एक दिन न्याय जरूर मिलेगा।”

फैसले को “खट्टा-मीठा पल” बताते हुए अंकुर ने कहा कि फैसले ने अपराध की गंभीरता को स्वीकार किया है, लेकिन परिवार के नुकसान की भरपाई कभी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, “अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है, इसलिए राहत तो है। लेकिन एक ऐसा खालीपन है जिसे कोई फैसला कभी नहीं भर सकता।”

पारिवारिक अवसरों पर दर्द विशेष रूप से तीव्र होता है। अंकुर ने पीटीआई को बताया, “मेरे भाई का जन्म 2 फरवरी, 1994 को हुआ था। इस साल वह 32 साल के हो जाते।” उन्होंने कहा कि हर जन्मदिन परिवार को उस जीवन की याद दिलाता है जो वह जी सकते थे, उन सपनों की जो वह पूरे कर सकते थे और उन पलों की जो उन्होंने हमेशा के लिए खो दिए हैं।

फैसले का स्वागत करते हुए अंकुर ने कहा कि परिवार की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।” उच्च न्यायालयों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार को उम्मीद है कि इस मामले को “दुर्लभतम मामला” माना जाएगा और दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति को एक समान सजा मिलेगी। उन्होंने पीटीआई से कहा, “तभी हमें लगेगा कि मेरे भाई और हमारे परिवार को पूर्ण न्याय मिला है।”

इसी बीच, हुसैन ने कहा कि वह फैसले को चुनौती देंगे। सजा सुनाए जाने के बाद अदालत कक्ष से बाहर ले जाते समय उन्होंने कहा, “इंसाफ हाई कोर्ट से मिलेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “उच्च न्यायालय न्याय दिलाएगा; अभी भी देर नहीं हुई है।”

इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने सभी पांच दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी, यह तर्क देते हुए कि यह अपराध “दुर्लभतम अपराध” की श्रेणी में आता है। विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने तर्क दिया कि शर्मा की बेरहमी से हत्या की गई थी और हमले के दौरान उन पर जरा भी रहम नहीं दिखाया गया था।

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