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पटरी के नीचे जमीन नहीं, समंदर! जहाज आते ही ऊपर उठ जाता है पुल, ऐसा है भारत का सबसे खतरनाक रेलवे ट्रैक

जरा कल्पना करके देखिए कि आप ऐसे सफर पर हैं, जहां बाहर झांकने पर हरे-भरे जंगल नहीं, नीला समंदर है। यह दृश्य ऐसा लग रहा है मानो हम पटरी पर न चलकर पानी पर चल रहे हैं।

अगर आप इसी तरह की रोमांच भरी ट्रिप का मजा लेना चाहते हैं तो पंबन रेल पुल को बकेट लिस्ट में जरूर शामिल करें। आइए आपको देश-दुनिया के इस सबसे खतरनाक रेल ब्रिज कहे जाने वाले पंबन पुल की कहानी बताते हैं।

दुनिया का सबसे खतरनाक पंबन रेल पुल

भारत में अनेकों ऐसे रेलवे ट्रैक हैं जो नदियों, पहाड़ों और घने जंगलों से होकर गुजरते हैं, लेकिन पंबन रेलवे ट्रैक की बात ही निराली है। दरअसल, यह पूरी दुनिया में सबसे खतरनाक रेलवे ट्रैक में से एक माना जाता है। यहां गुजरते वक्त लगभग हर यात्री की सांसे थम जाती हैं।

बता दें कि यह पुल तमिलनाडु राज्य में रामनाथपुरम जिले के मंडपम और पंबन द्वीप पर स्थित रामेश्वरम के बीच समुद्र पर बना हुआ है। करीब 2.2 किलोमीटर लंबे से इस ट्रैक को भारत का पहला समुद्री रेलवे पुल कहा जाता है। इसकी सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसके बीच का हिस्सा जहाजों को रास्ता देने के लिए ऊपर भी उठाया जा सकता है।

100 साल पुराना है इतिहास

पंबन पुल का इतिहास आज से 100 पुराना है क्योंकि इसका निर्माण ब्रिटिश काल में 1914 में हुआ था। अंग्रेजों ने व्यापार को बढ़ावा देने के लिए इसे बनाया था। कहा जाता है कि उस दौर में धनुषकोडी से श्रीलंका के तलाइमन्नार के बीच जहाज चला करते थे, जिसे पार करने में महज कुछ घंटों का समय लगता था।

पहला इलेक्ट्रो-मैकेनिकल और हाइड्रोलिक वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज

उस समय जब पुल से ट्रेन गुजरती थी, तब उसकी रफ्तार 10 किमी प्रति घंटे की हुआ करती थी, पर आज नए ब्रिज की रफ्तार बढ़ाकर 80 किमी प्रति घंटे की कर दी गई है।

वहीं, जब जहाज आते थे तो औरने ब्रिज को मैन्युअली 30-40 लोगों की मदद से खोला जाता था, आर अब यह व्यवस्था पूरी तरह से आधुनिक हो गई है। नए पुल को हाइड्रॉलिकली ओपन किया जाता है। इस तरह साल 2025 के बाद पंबन पुल पहला समुद्री ब्रिज होने के साथ ही पहला इलेक्ट्रो-मैकेनिकल और हाइड्रोलिक वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज बन गया है।

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