अंतरराष्ट्रीय

ब्रिटेन में 40 साल पुराने राम मंदिर पर संकट, हिंदू-मुस्लिम समाज में छिड़ी कानूनी जंग; जानें क्या है पूरा मामला

लंदन से तकरीब 120 किलोमीटर दूर पीटरबरो शहर के न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स में भगवान राम का मंदिर है. पीटरबरो सिटी काउंसिल ने साल 2026 में ही 10 फरवरी को इस कॉम्पेलक्स को यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन नाम के संगठन को बेच दिया है. पीटरबरो सिटी के हिंदू समाज के लोगों ने काउंसिल के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया था. अब हिंदू समाज यह मामला लेकर यूके के हाईकोर्ट में पहुंच गया है.

न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स में ‘भारत हिंदू समाज’ नाम का यह मंदिर 40 साल पहले स्थापित किया गया था. द टेलीग्राफ के मुताबिक इसकी स्थापना उन हिंदु परिवारों ने साल 1986 में की थी, जिन्हें 1972 में तानाशाह ईदी अमीन ने युगांडा से निकाल दिया था. यह 35 मील 56.32 किलोमीटर के दायरे में एकमात्र हिंदू मंदिर है.

Uk Ram Mandir

मंदिर के ट्रस्टियों का काउंसिल पर क्या आरोप है?
पीटरबरो सिटी काउंसिल ने 2025 में लगभग £500 मिलियन यानी 6,440 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने के तहत इस इमारत को बेचने का फैसला किया था.BHS मंदिर के ट्रस्टियों को कहना है कि इस कॉम्प्लेक्स को खरीदने के लिए 10 सालों से काउंसिल से बातचीत कर रहे थे. उन लोगों ने 1.3 मिलियन पाउंड यानी 16.3 करोड़ रुपये का ऑफर भी पीटरबरो काउंसिल को दिया था.

मंदिर के ट्रस्टियों का कहना है कि 10 फरवरी को काउंसिल ने इसे UKIM को बेचने का फैसला कर लिया. पीटरबरो काउंसिल ने खदीजा मस्जिद, जो UKIM का हिस्सा है, उसे न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स को 14 लाख पाउंड (करीब 18 करोड़ रुपये) बोली लगाकर कॉम्प्लेक्स को खरीद लिया. हालांकि, हिदू समाज के विरोध के बाद इस फैसले को कैबिनेट के पास वापस भेजा गया. लेकिन, वहां भी पीटरबरो काउंसिल के फैसले को बरकरार रखा गया. हालांकि, हिंदू समाज ने हाईकोर्ट पहुंचकर पीटरबरो काउंसिल के फैसले पर रोक लगवा दी.

भारत हिंदू समाज की कानूनी टीम का तर्क है कि काउंसिल की प्रक्रिया गैर-कानूनी थी. काउंसिल ने ‘इक्वालिटी एक्ट 2010’ का उल्लंघन किया है. साथ ही उनका कहना है कि मंदिर के बंद होने से हिंदू समुदाय पर बहुत बुरा असर पड़ेगा. हालांकि, जवाब में काउंसिल की बैरिस्टर कैथरीन रोलैंड्स ने कोर्ट को बताया कि परिसर की बिक्री पारदर्शी, निष्पक्ष और कानूनी बोली प्रक्रिया के तहत हुई थी.

मुस्लिम पक्ष का क्या है कहना
वहीं, खदीजा मस्जिद समुह का कहना है उनकी लगभग 40 साल पुरानी जगह अब छोटी पड़ गई है और वे प्रार्थना स्थलों, क्लासरूम और खेल सुविधाओं वाला एक यूनिटी सेंटर बनाना चाहते हैं.दोनों पक्षों का मानना है कि इस विवाद को एक धर्म बनाम दूसरे धर्म के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि, दोनों समुदायों में कानूनी लड़ाई तो चल ही रही है, साथ ही तनाव में भी इजाफा हो रहा है.

मंदिर के लिए अन्य विकल्पों की तलाश
काउंसिल की नेता शबीना कय्यूम ने ‘द टेलीग्राफ’ को दिए एक बयान में कहा कि उन्हें पता है कि इस बिक्री से हिंदू समुदाय में काफ़ी चिंता और परेशानी हुई है. लेकिन वे भरोसा रखे दिलाया कि उन्हें बेघर नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अधिकारी BHS के साथ मिलकर दूसरी जगह की तलाश कर रहे हैं. वहीं, मंदिर के ट्रस्टियों का कहना है कि अब तक कोई सही विकल्प नहीं दिया गया है.

‘शहर में एक ही मंदिर वह भी छीना जा रहा’
भारत के हिंदू समाज का कहना है कि शहर में 19 मस्जिदें हैं. 100 से ज़्यादा चर्च हैं. 50 किलोमीटर के दायरे में यह अकेला हिंदू मंदिर है. पीटरबरो सिटी काउंसिल से यह सवाल पूछा जाना चाहिए, उनके अकेले हिंदू मंदिर को क्यों हटाया जा रहा है और उसे किसी दूसरे धर्म को क्यों दे दिया जा रहा है, जिसके पास पहले से ही जाने के लिए 19 और जगहें हैं?

काउंसिल के 10 में से 5 सदस्य मुस्लिम
पीटरबरो काउंसिल पर सवाल उठने की एक वजह और है. दरअसल, चेयरमैन शबीना कय्यूम समेत काउंसिल के 10 सदस्यों में से 5 मुस्लिम समुदाय से आते हैं. ऐसे में दबी आवाज़ में भारत हिंदू समाज ने काउंसिल पर उनके साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है.

पीटरबरो शहर में अल्पसंख्य है हिंदू समाज
पीटरबरो शहर की कुल आबादी लगभग 2,25,000 है. 2021 की यूके जनगणना के अनुसार, शहर की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 12.2% है, जो एक दशक पहले 9.4% थी. वहीं हिंदुओं की हिस्सेदारी 1.8% है, जबकि 2011 में यह 1.5% थी. यानी कि साफ तौर पर हिंदू समाज यहां अल्पसंख्यक है. ऐसे में हिंदू समाज का यह भी तर्क है कि उसकी भावनाओं का ख्याल रखा जाए, शहर में मौजूद एकमात्र मंदिर को उसकी जगह पर ही रहने दिया जाए.

 

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