MP के 58 लाख स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म की जगह मिलेंगे ₹600! सरकार फिर बदलेगी नियम

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ने वाले 58 लाख से अधिक विद्यार्थियों को इस बार ड्रेस के बजाय नकद राशि मिल सकती है। सरकार प्रति विद्यार्थी 600 रुपये डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर निर्णय लिया जा सकता है।
सरकार ने जून 2026 में विद्यार्थियों को दो-दो ड्रेस सिलवाकर देने का फैसला किया था। इसके लिए मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम ने 3 जून को करीब 350 करोड़ रुपये की निविदा जारी की थी। हालांकि, निविदा प्रक्रिया से जुड़ा मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद अंतरिम रोक लग गई। सितंबर खत्म होने को है और अब तक टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
समय पर ड्रेस पहुंचाना मुश्किल
स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि अब निविदा प्रक्रिया शुरू की जाती है तो ड्रेस तैयार कराने और उन्हें प्रदेशभर के स्कूलों तक पहुंचाने में काफी समय लगेगा। ऐसे में विद्यार्थियों को ड्रेस देने के बजाय सीधे राशि उपलब्ध कराने का विकल्प तैयार किया गया है।
विभाग ने इसी आधार पर कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में लिया जाएगा।
पहले भी कई बार बदली व्यवस्था
सरकारी स्कूलों के बच्चों की गणवेश को लेकर व्यवस्था पहले भी कई बार बदली जा चुकी है। वर्ष 2020 में ड्रेस सिलाई का काम महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया था, लेकिन समय पर वितरण नहीं हो सका। मार्च 2021 में सत्र बीतने के बाद ड्रेस स्कूलों तक पहुंची। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण शिक्षकों को घर-घर जाकर गणवेश वितरित करनी पड़ी।
इसके बाद भी देरी का सिलसिला जारी रहा। वर्ष 2022 की ड्रेस कई विद्यार्थियों को 2023 में मिली, जबकि कुछ बच्चों को 2024 का सत्र खत्म होने तक भी गणवेश नहीं मिल सकी।

