उत्तर प्रदेशराज्य

‘पति पसंद नहीं है…’ बागपत में देवर से शादी करने के लिए अड़ी भाभी, हसबैंड भी इस रिश्ते के लिए हुए राजी

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के दौरान एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. दरअसल एक शादीशुदा महिला जिसका अपनी पहली शादी से एक बच्चा भी है, वो इस सामूहिक विवाह योजना में पहुंची और उसने देवर के साथ सात फेरे लेने की इच्छा जताई. हैरानी की बात यह है उसके पति ने भी पत्नी की इच्छा का समर्थन किया और कहा पत्नी को मैं नहीं, बल्कि मेरा छोटा भाई पसंद है. जानकारी के मुताबिक इस जोड़े ने पंचायत के जरिए तलाक होने का दावा भी किया है, लेकिन अधिकारियों ने कानूनी कागजात नहीं होने पर महिला का सामूहिक विवाह से आवेदन खारिज कर दिया है.

पति के साथ आई, देवर से करनी थी शादी

बागपत में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आए आवेदनों की जांच चल रही थी. इसी बीच एक महिला अपने पति और एक बच्चे के साथ अधिकारियों के सामने पहुंची. दस्तावेजों की जांच में पता चला कि महिला पहले से शादीशुदा है और उसका एक बच्चा भी है. इसके बावजूद वह सामूहिक विवाह योजना के तहत अपने देवर के साथ सात फेरे लेने की तैयारी में थी.

‘मुझे पति पसंद नहीं, देवर से करूंगी शादी’

जब अधिकारियों ने महिला से पूछा कि शादीशुदा होते हुए वह दूसरी शादी कैसे कर सकती है, तो उसने चौंकाने वाला जवाब दिया. महिला ने कहा कि उसे अपना पति पसंद नहीं है और वह देवर से शादी करना चाहती है. उसने बताया कि गांव में पंचायत बैठी थी, जहां पंचों ने उन दोनों का तलाक करा दिया था. सबूत के तौर पर उसने सादे कागज पर लिखा पंचायत का फैसला भी अधिकारियों को दिखाया है.

पति ने भी किया पत्नी की बात का समर्थन

इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात यह थी कि महिला के साथ आए उसके पति ने भी अपनी पत्नी का समर्थन किया है. पति ने अधिकारियों से कहा कि उसकी पत्नी सच बोल रही है, उसे मैं नहीं, मेरा छोटा भाई पसंद है. पति ने भी पंचायत से तलाक होने की बात को सही बताया है और अपनी पत्नी की छोटे भाई से शादी कराने की पैरवी की है.

बिना कानूनी तलाक के खारिज हुआ आवेदन

पति-पत्नी ने पंचायत के फैसले को ही तलाक का आधार बताया है, लेकिन सरकारी नियमों के आगे उनकी एक नहीं चली. जिला समाज कल्याण अधिकारी नीलम चौहान ने बताया कि पंचायत का फैसला या सादे कागज पर लिखा तलाकनामा कानूनी तलाक नहीं माना जा सकता है. दूसरी शादी के लिए पहले कानूनी प्रक्रिया के तहत तलाक होना जरूरी है. चूंकि महिला कानूनी तलाक के कागजात पेश नहीं कर पाई, इसलिए उसका आवेदन तुरंत निरस्त कर दिया गया. बता दें कि इस योजना के तहत 220 आवेदन आए थे, जिनमें से 149 जोड़ों की शादी 25 अक्टूबर को संपन्न कराई गई है.

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